बिहार सर्वे :- इस पार्टी का मुख्यमंत्री बनना तय – जाने किसको मिलेगी कितनी सीट

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम लोग चुनाव के एलान का स्वागत करते हैं. कोरोना वायरस को लेकर लोगों की अलग अलग मांग थी, फैसला चुनाव आयोग को लेना था.

3 फेज़ का चुनाव तय हुआ है, दशहरा और दीपावली के बीच चुनाव और परिणाम आ जाएगा. हम तो हमेशा कहते हैं जनता मालिक है और उनको तय करना है वो किसको मौका देंगे. जनता ने पहले मौका दिया है, अगर फिर मौका देंगे तो हम लोग काम करेंगे.

बिहार विधानसभा की 243 सीटों में 141 से 161 सीटें एनडीए के खाते में जाती हुई दिख रही हैं. यूपीए को 64 से 84 और अन्य को 13 से 23 सीटें मिलने का अनुमान है.

ओपिनयन पोल के मुताबिक उत्तर बिहार में एनडीए को 47 से 51 और यूपीए को 17 से 21 सीटें मिल सकती हैं. अन्य के खाते में 4 से 6 सीटें जा सकती हैं.

2015 में इस क्षेत्र में यूपीए ने एनडीए के मुकाबले लगभग दोगुनी सीटें जीती थीं. यूपीए के खाते में 44 सीटें आई थीं. वहीं एनडीए सिर्फ 25 सीटों पर विजयी हुआ था. अन्य 4 सीटों पर जीते थे.

उत्तर बिहार में विधानसभा की सबसे ज्यादा 73 सीटें हैं. इन 73 सीटों में भी NDA को भारी बढ़त मिलती हुई दिख रही है. उत्तर बिहार में एनडीए को 47 से 51 सीटें मिल सकती हैं. वहीं 17-21 सीटें यूपीए को मिलने का अनुमान है.

बता दें कि सी-वोटर के साथ मिलकर एबीपी न्यूज़ ने जनता की नब्ज़ टोटलने की कोशिश की है और इसके आधार पर अनुमान लगाया कि आगामी बिहार चुनाव में किसकी सरकार बन सकती है.

साल 2020 में मगध/भोजपुर में वोट प्रतिशत के अनुमान की बात करें तो NDA को 44.5 प्रतिशत, UPA को 33.6 प्रतिशत और अन्य को 21.9 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है.

मगध-भोजपुर इलाके की 69 विधानसभा सीटों में भी लालू यादव की पार्टी का गठबंधन पिछड़ती दिख रहा है. इस इलाके में NDA-39-43, UPA-20-24 और अन्य, 5-7 सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं.

एबीपी न्यूज-सी वोटर के सर्वे में बिहार में फिर से नीतीश सरकार का अनुमान है. चार इलाकों के रुझान में NDA को बंपर बढ़त मिलती दिख रही है.

2015 में एनडीए को 30.4% और यूपीए को 46.7 % वोट मिले थे लेकिन 2020 में एनडीए का वोट शेयर 44.3% जबकि यूपीए का 34.4 % रहने की उम्मीद है.

2015 के विधानसभा चुनाव में मिथिलांचल में एनडीए को सिर्फ 5 सीटें मिली थीं जबकि यूपीए ने 45 सीटों पर जीत दर्ज की थी और अन्य के खाते में एक भी सीट नहीं गई थी.

बिहार-243 सीटें | मिथिलांचल की 50 सीटों में से NDA को 27-31 सीटें मिलती दिख रही हैं. इस क्षेत्र में भी महागठबंधन को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है.

बिहार का सबसे बड़ा ओपिनियन पोल

मिथिलांचल की 50 सीटों में से NDA को 27-31 सीटें मिलती दिख रही हैं. इस क्षेत्र में भी महागठबंधन को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है. यूपीए को 16 से 20 और अन्य को 2 से 4 सीटें मिलती दिख रही हैं.

सर्वे के मुताबिक इस बार पूर्वी बिहार में इस बार NDA के खाते में 12.1 प्रतिशत और UPA के खाते में -10.6 प्रतिशत वोट स्विंग के आसार हैं.

इस बार NDA को 46.2 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं. वहीं UPA को पूर्वी बिहार में 31.3 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं. अन्य के खाते में 22.6 प्रतिशत वोट पड़ने के आसार हैं.

साल 2015 के विधान सभा की बात करें तो NDA को पूर्वी बिहार में 3 सीटों पर संतुष्ट होना पड़ा था. वहीं यूपीए को पिछली बार 24 सीटों पर जीत मिली थी.

पूर्वी बिहार यानी अंग प्रदेश की 27 विधानसभा सीटों में एनडीए को 14 से 18 सीटें, लालू यादव के गठबंधन को 7 से 11 सीटें और अन्य को 1 से 3 सीटें मिलने का अनुमान है.

सीमांचल एक्सपर्ट अरविंद मोहन ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी कई सीटों पर वोट काटने में कामयाब रहेंगे. लेकिन वोट का विभाजन दोनों तरफ से होगा इसलिए आरजेडी कई सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रहेगी. बता दें कि सीमांचल में पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार जिले हैं. यहां मुस्लिम वोटर भी कई जगह निर्णायक भूमिका में हैं.

सीमांचल एक्सपर्ट अरविंद मोहन ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी कई सीटों पर वोट काटने में कामयाब रहेंगे. लेकिन वोट का विभाजन दोनों तरफ से होगा इसलिए आरजेडी कई सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रहेगी. बता दें कि सीमांचल में पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार जिले हैं. यहां मुस्लिम वोटर भी कई जगह निर्णायक भूमिका में हैं.

सीमांचल एक्सपर्ट अरविंद मोहन ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी कई सीटों पर वोट काटने में कामयाब रहेंगे. लेकिन वोट का विभाजन दोनों तरफ से होगा इसलिए आरजेडी कई सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रहेगी. बता दें कि सीमांचल में पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार जिले हैं. यहां मुस्लिम वोटर भी कई जगह निर्णायक भूमिका में हैं.

सीमांचल के क्षेत्र में नीतीश कुमार के गठबंधन को 50 फीसदी, लालू यादव की पार्टी और गठबंधन को 25 फीसदी और अन्य को 25 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं.

NDA को सीमांचल की 24 में से 18 सीटें मिलती दिख रही हैं. इस क्षेत्र में लालू यादव की पार्टी को बड़ा नुक्सान होता दिख रहा है.

चुनाव आयोग का कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सांप्रदायिक तनाव और उपद्रव फैलाने के लिए करने पर कड़े परिणाम भुगतने होंगे. इस बार नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा.

पहले चरण के मतदान में करीब 31,000 बूथ पर वोट डाले जाएंगे, दूसरे चरण में 42,000 बूथ पर और तीसरे चरण में साढ़े 33 हजार बूथ पर वोट डाले जाएंगे.

कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए हर मतदान केंद्र पर सिर्फ एक हजार मतदाता ही वोट देंगे. मतदान केंद्रों पर सैनिटाइजर से लेकर सभी तरह की व्यवस्थाएं रहेंगी. कोरोना से संक्रमित मरीज मतदान के आखिरी दिन अपने संबंधित मतदान केंद्रों पर स्वास्थ्य अधिकारियों की देखरेख में वोट डाल सकेंगे.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा का कहना है कि कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए एक घंटे का समय बढ़ाया गया है. इस बार सुबह सात से शाम छह बजे तक मतदान होगा. इससे पहले शाम पांच बजे तक मतदान होता था.

कोरोना संक्रमण के कारण उम्मीदवार को चुनाव प्रचार के दौरान जनसभाओं में उम्मीदवारों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा. चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवार अपने साथ 4 अन्य लोगों को लेकर घर-घर जाकर कैंपेनिंग कर सकते हैं. उम्मीदवार नामांकन के लिए 2 से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

2015 बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने जीत हासिल की थी. नीतीश कुमार की जेडीयू, लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और कांग्रेस ने महागठबंधन बनाकर बीजेपी, आरएलएसपी और एलजेपी के गठबंधन पर जीत हासिल की थी. महागठबंधन को 43 फीसदी वोट मिले. आरजेडी को 18.4 फीसदी, जेडीयू को 16.8 फीसदी और कांग्रेस को 6.7 फीसदी वोट मिले.

बिहार में विधानसभा की कुल 243 सीट हैं. इन सीटों में 38 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं. दो सीटें अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए आरक्षित हैं.

कोरोना के कारण इस बार ऑनलाइन नामांकन भी हो सकेंगे, लेकिन उम्मीदवारों को नामांकन का प्रिंटआउट जमा करना होगा. ऑफलाइन नमांकन की सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेगी. चुनाव प्रचार के दौरान जनसभाओं में उम्मीदवारों को सामाजिक दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा.

नामांकन दाखिल करने के लिए उम्मीदवार के साथ दो लोग जा सकते हैं. उम्मीदवार को मिलाकर 5 लोग घर-घर जाकर कैंपेनिंग कर सकते हैं. नामांकन के लिए 2 से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे उम्मीदवार.

चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव कोरोना महामारी के मौजूदा हालात में दुनियाभर में होने वाले सबसे बड़े चुनावों में से एक होंगे. चुनाव में मतदान के लिए एक घंटे का समय बढ़ाया है. सुबह 7 से शाम छह बजे तक मतदान होगा. पहले शाम 5 बजे तक मतदान होता था. हालांकि, यह सुविधा नक्सल प्रभावित इलाकों में नहीं होगी.

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने आज तारीखों का एलान कर दिया है. अब महीनेभर धुंआधार प्रचार का सिलसिला चलेगा. इससे पहले लोगों के मन में सवाल है कि एनडीए और महागठबंधन में से बिहार के तख्त पर कौन और कितनी मजबूती के साथ बैठेगा. सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.

इसी को ध्यान में रखते हुए जनता का मूड समझने के लिए एबीपी न्यूज़ ने सी-वोटर के साथ मिलकर ओपिनियन पोल किया है. इस ओपिनियन पोल में हम बिहार की 243 विधानसभा सीटों की जनता की राय आपके सामने रखेंगे.

तीन चरणों में मतदान, 10 नवंबर को काउंटिग

बिहार विधानसभा चुनाव कुल तीन चरणों में होंगे. पहले चरण में 16 जिलों के 71 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होंगे. दूसरे चरण में कुल 17 जिलों के 94 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होंगे. तीसरे चरण में 15 जिलों के 78 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होंगे. पहले चरण के लिए एक अक्टूबर को अधिसूचना जारी होगी.

पहले चरण के लिए 28 अक्टूबर, दूसरे चरण के लिए तीन नवंबर और तीसरे चरण के लिए 7 नवंबर को मतदान होगा. वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी. पहले चरण के मतदान में करीब 31,000 बूथ पर वोट डाले जाएंगे, दूसरे चरण में 42,000 बूथ पर और तीसरे चरण में साढ़े 33 हजार बूथ पर वोट डाले जाएंगे.